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जानिए भारत के प्रथम व्यंगकार के बाड़े में..जिनके नाम पर मध्य प्रदेश सरकार देती है सम्मान।

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फाइल फोटो साभार गुगल

आज भारत के प्रथम व्यंग्यकार शरद जोशी जी का जन्म दिवस है, उनका जन्म मध्य प्रदेश के उज्जैन में 21 मई 1931 को हुआ था। उनका लगाव शुरू से ही लेखन की तरफ था उन्होंने अपने जीवन काल के दौरान मध्य प्रदेश सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में काम किया लेकिन लेखन के लिए उन्होंने सरकारी नौकरी को त्याग दिया और इंदौर में ही रहकर रेडियो और समाचार पत्रों के लिए लेखन कार्य करने लगे। उन्होंने कई कहानियां धारावाहिक उपन्यास आदि भी लिखे लेकिन सर्वाधिक लोकप्रियता उन्हें व्यंग्यकार के रूप में ही मिली।
उनके लिखे हास्य व्यंग पूर्ण धारावाहिकों की पटकथा एवं संवाद भी काफी चर्चित रहे हिंदी व्यंग को प्रतिष्ठा दिलाने वाले प्रमुख व्यंगकारों में शरद जोशी का नाम सर्वाधिक ख्याति प्राप्त है। इनकी रचनाओं में भारतीय समाज में पाई जाने वाली सभी विसंगतियों का बेबाक चित्रण देखने को मिलता रहा है।
श्री शरद जोशी जी ने अपने लेखनी के बारे में कहा था की लिखना मेरे लिए जीवन जीने की कला है, अपने द्वारा लिखे लेख को देखकर मैं सिर्फ यही सोच पाता हूं कि चलो इतने बरस जी लिया, अगर यह लेखनी ना होती तो इसका क्या विकल्प होता, लेखन मेरा निजी उद्देश्य है, एक समय ऐसा भी आया कि श्री शरद जोशी ने अपने जीवन के बारे में कहते हुए यह कहा कि अब जीवन का विश्लेषण करना मुझे अजीब लगता है क्योंकि बढ़-चढ़कर यह कहना कि मेरा जीवन संघर्ष में ही रहा है, लेखक होने के कारण मैंने दुखी जीवन जीया है, कहना बेकार होगा, वह आगे कहते हैं कि जीवन होता ही संघर्ष के लिए है आखिर किस का जीवन संघर्षमय नहीं होता, तो फिर लिखने वाले लेखक का ही अगर जीवन संघर्ष में रहा है तो इसमें अजीब क्या है ।
श्री शरद जोशी जी के लिखे शब्दों से आज भी हमें बहुत कुछ सीख लेने की आवश्यकता है।
श्री शरद जोशी जी के निधन के पश्चात मध्य प्रदेश सरकार ने उनके नाम पर शरद जोशी सम्मान भी शुरू किया।
ज्ञात हो कि श्री शरद जोशी का 5 सितंबर 1991 को महाराष्ट्र के मुंबई में निधन हो गया था।

आज आखिर मैंने क्यों शरद जोशी जी के जन्मदिन पर उन्हें याद किया
दरअसल मुझे हमेशा से ही व्यंग पढ़ना अच्छा लगता है, इसी कारण श्री शरद जोशी जी को हमेशा ही 1990 के दशक से लेकर आज तक विभिन्न प्रिंट मीडिया इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं डिजिटल मीडिया के प्लेटफार्म पर उन्हें पढ़ता रहा हूं इसी कारण उनसे विशेष लगाव है।
यह अलग बात है कि अब वह हमारे बीच उपलब्ध नहीं लेकिन उनके प्रति मेरे हृदय में सम्मान का भाव रहता है, जिसका कारण बस इतना है कि वह हमेशा से ही अपने लिखे व्यंग के माध्यम से आम लोगों के रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी बातें एवं उनमें मौजूद विरोध के स्वर को समझने के गहरी रुचि रखते थे, और इसी वजह से वह भारत में काफी लोकप्रिय भी थे। उनके निधन के बाद तो भारत में वैश्वीकरण और भ्रष्टाचार जैसी चुनौतियों के बीच लिखने वाले व्यंग्यकार अब विरले ही बचे हैं।
आज उनके जन्म दिवस के अवसर पर उन्हें अपनी ओर से शत शत नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

यशवंत कुमार चौधरी प्रबंध संपादक बिहार खबर डॉट इन द्वारा प्रसिद्ध व्यंगकार शरद जोशी जी के जन्म दिवस पर प्रेषित आलेख

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